एपहेमरल फीवर एक वायरल बीमारी है जो जानवरों में तीन दिन तक चलने वाली बिमारी के रूप में दिखाई देती है। इसमें सूजे हुए लिम्फ नोड्स, हृदय के चारों ओर पानी भरना, फेफड़ों में सूजन, जोड़ में सूजन, मांसपेशियों में नुकसान और पेट में खून का जमाव जैसे लक्षण होते हैं।
रोग का कारण:
- यह बीमारी वेसिकुलोवायरस नामक एक वायरस से होती है, जो रैब्डोवायरिडे परिवार से है।
रोग का फैलाव (Pathogenesis): यह वायरस कीटों द्वारा जानवरों में फैलता है। वायरस शरीर में जाने के बाद 2-10 दिनों तक आराम करता है और फिर रक्त में फैलने लगता है। इसके बाद, वायरस जानवरों के जोड़, लिम्फ नोड्स और मांसपेशियों में जमा हो जाता है।
लक्षण (Symptoms):
- तीन दिन की बीमारी (Three-day sickness)
- जोड़ में अकड़न और लंगड़ी होना (Shifting lameness)
- तेज बुखार जो तीन दिन में ठीक हो जाता है
- जोड़ में stiffness यानी अकड़न (Stiffness of joints)
जांच के तरीके (Diagnosis):
- लक्षण और शरीर के घावों का ध्यानपूर्वक निरीक्षण
- ELISA टेस्ट से वायरस के एंटीजन और एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है
- प्रभावित ऊतकों में वायरस का पता लगाने के लिए इम्यूनोपरोक्सिडेज तकनीक का उपयोग किया जाता है
अधिकांश लक्षण:
- हृदय के चारों ओर पानी (हाइड्रोपेरिकार्डियम) और फेफड़ों में पानी (हाइड्रॉथोरेक्स)
- सूजे हुए लिम्फ नोड्स
- नाक और गले की सूजन
- मांसपेशियों में घाव और नुकसान
इस बीमारी का समय रहते इलाज करना बहुत जरूरी है, ताकि जानवरों को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो और उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।
“यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के उद्देश्य से दी गई है। कृपया अधिक जानकारी और उचित चिकित्सा के लिए अपने पशु चिकित्सक से संपर्क करें।”

